Bandish in Raga Durga

१. जय दुर्गे माता भवानी, ताल : रूपक, लय : मध्य

Jai durge mata bhavani, Taal: Rupak, Laya: Madhya 

स्थायी

जय दुर्गे माता भवानी, जगत जननी शरण तिहरे |

अंतरा

विद्या सुख दायिनी , पाप संहारिनि , जय जय जय तोरी हे भव तारिणी ||

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This bandish is composed by Dr. Revati Kamat. 

२. अखिल जगत जननी तू देवी, ताल : तीनताल, लय : मध्य

Akhil jagat janani tu devi, Taal: Teentaal, Laya: Madhya 

स्थायी

अखिल जगत जननी तू देवी, महिषासुर मर्दिनी भवतारिणी, त्रिविध ताप मनीचे मम शमवी |

अंतरा

असुर पतित मय धरा जाहली, भाव भक्ति हरि सेवा नुरली, दलन करुन अरि जन मन रमवी ||

This composition has been contributed by Dr. Vrushali Deshmukh.

Other Comments: 

This is a Marathi bandish. 

३. गावत दुर्गा रागिनी, ताल: तीनताल, लय: मध्य

Gaawat durga ragini, Taal: Teentaal, Laya: Madhya 

स्थायी

गावत दुर्गा रागिनी, औडव सूर शुद्ध बनी
वर्जित ग नी अत शोभिनी

अंतरा

वादी सुरवर धैवत, संवादी द्वितिय कहत

धीर वीर अत गंभीर, समय कहत दिन यामिनी ||

Other Comments: 

This is a Lakshan Geet. 

४. दुर्गे माते भवानी, ताल: एकताल, लय: द्रुत

Durge maate bhavani, Taal: Ektaal, Laya: Drut 

स्थायी

दुर्गे माते भवानी
भक्त वत्सल जग जननी
सुख करनी दु:ख हरनी |

अंतरा

आदि ज्योती मां भवानी
काम रुपी ज्वाला मुखी
खडग धारिणी देवी ||

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५. हरी हर ब्रह्म रूप, ताल: एकताल, लय: द्रुत

Hair har brahma rupa, Taal: Ektaal, Laya: Drut

स्थायी

हरी हर ब्रह्मरूप, त्रय गुन की त्रय मुरत||

अंतरा

तू जल में, तू थल में, काठ में उपल में तू

तू हि आद तू ही अंत, तुम्हारो हम ध्यान धरत ||

This bandish has been contributed by Madhavi Kelkar – Chakradeo.

Other Comments: 

This bandish has been composed by Pt. Chhota Gandharva.

६. अंबे दुर्गे दयानिधे, ताल: तीनताल, लय: द्रुत

Ambe durge dayanidhe, Taal: Teentaal, Laya: Drut

स्थायी

अंबे दुर्गे दयानिधे,

नमामि, स्मरामि, भजामि ||

अंतरा

मंत्रमयी देवी प्रणयगायिनी

पशुपति भामिनी माया ||

This bandish has been contributed by Madhavi Kelkar – Chakradeo.

Other Comments: 

This bandish is composed by Pt. Kashinath Shankar Bodas.

७. गुन सुन आयो, ताल: रूपक, लय: विलंबित

Gun sun aayo, Taal: Rupak, Laya: Vilambit

स्थायी

गुन सुन आयो, तज द्वार अपनो|

अंतरा

गरीब नवाज बाँह गहि लीजै,

रामरंग रखिये शरण अपनो||

This bandish has been contributed by Madhavi Kelkar – Chakradeo.

Other Comments: 

This bandish is composed by Pt. Ramashray Jha.

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