Bandish in Raga Jhinjhoti

१. मेरो मन सखी हर लिनो, ताल: तीनताल, लय: द्रुत

Mero mana sakhi, Taal: Teentaal, Laya: Drut

स्थायी

मेरो मन सखी हर लिनो सावरियाँ ने,

सुंदर सुरत अत रंगभरी चितचोरी,

सुध बुध बिसर गई मोरी सारी|

अंतरा

सोवत जागत मन लागी रहत नित,

कछु नही मोहे अब, सुझ – बुझ आज

लाज काज की, तरपत जिया

देखो सखी री मैं भई वाके चरनन की चेरी ||

This bandish has been contributed by Madhavi Kelkar – Chakradeo.

Other Comments:

This bandish is by N. Ratanjankar.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *